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Monday, April 18, 2011

कशिश.....


इंतज़ार  रुलाता  है , तकरार  भी  रुलाती  है,
चाहते  तो  सिर्फ  प्यार  हैं ,
मगर  तेरी  हर  बात  हंसती  है ,  फिर  रुलाती  है ...
दूर  जाना  चाहें   तो  जायें   कैसे ?
तेरी  हर  बात  हमे   वापिस  खिंच   के  ले  आती  है ...

Monday, March 7, 2011

इंतज़ार ...


पैगाम  आने  पर  हंसी  होंठों  पे  आती  है ,
आंखें  नम  हो  जाती  हैं, दिल  की  धड़कन  थम  जाती  है......

इंतज़ार  में  उनके  घड़ी  की  सुइयों  को  टक-टकी  लगा  देखते  हैं,
वो  आयेंगे,  इस  उम्मीद  में  पहले  दिन , और  फिर  रात  ढल  जाती  है......

उम्मीद...


आंसूं  को  समझ  पाते , तो  क्या  गम  था ,
दिल  की  बातें  जान  जाते , तो  गम  क्या  था...

हम  उम्मीद  में  बैठे  रहे , की  आओगे   तुम ,
इंतज़ार  को   हमारे  समझ  पाते , तो  क्या गम  था ....